Monthly Archives

October 2021

नारी सशक्तिकरण को समर्पित महाप्रकल्प है वात्सल्यग्राम

By ChikitsalayaNo Comments

नवरात्रि एक पर्व, महोत्सव और वार्षिक/अर्धवार्षिक अनुष्ठान का नाम ही नहीं है। ये पर्व है शक्ति पूजन का, शक्ति की आराधना का, शक्ति की साधना का। शक्ति अर्थात माँ पार्वती, माँ दुर्गा, माँ सर्वमंगला।

शक्ति की आराधना का ये पर्व मात्र व्रत और धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं हैं। सनातन अपनी व्यावहारिक आस्था के लिए प्रसिद्द है। मात्र कलश स्थापना के साथ व्रत रखने से, मेलों से, भजन संध्या आयोजनों से और जगरातों से ही शक्ति की, माँ सर्वदेवी की पूजा नहीं होती। शक्ति की साधना का, आराधना का अर्थ होता है शक्ति को प्राप्त करना, जिनके बिन शिव भी शव हों, उन माँ दुर्गा की।

नवरात्रि उत्सव है नारी के शक्तिशाली और समर्थ होने का। जब माँ दुर्गा नरपिशाचों का वध करती हैं उन्हें अपने हथियार देते हैं। रक्तबीज, चाँद, मुंड और महिषासुरों को दंडित करने का कार्य माँ अपने हाथ लेती हैं। उस महान परंपरा के पूजन का महापर्व है नवरात्रि जिसमें कन्यापूजन विशेष महत्व रखता है। आज अष्टमी है, अनेकों घरों में महाष्टमी का पूजन होता है, लोग अपने आसपड़ोस से बच्चियों को भोज पर आमंत्रित करते हैं, उनके चरण पखारते हैं, उन्हें प्रेम से प्रसाद परोसा जाता है, अंत में दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया और विदा किया जाता है, ये है आस्थाओं का सनातनी सागर जिसमें माँ सर्वोपरी है, नारी ही नारायणी है।

वास्तविक धरातल पर नारी के इसी शक्तिस्वरूप का विस्तार है वात्सल्यग्राम। एक परियोजना जिसका शुभारंभ हुआ एक माँ के हाथों, जिसने वृद्धाश्रम, अनाथालय और नारी निकेतन जैसे संवेदनहीन शब्दों से परे, एक परिवार का स्वरुप रच दिया, परिवार उनका, जिनका आपस में कोई रक्त-संबंध भले न हो, लेकिन भावनाओं का एक सागर है जिसमें सभी एक दूसरे के साथ बंध जाते हैं।

माँ सर्वमंगला पीठम जैसे भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण विशुद्ध सनातनी नारीवाद का अप्रतिम उदाहरण है। यही हमारा सच है, यही सनातन है। सहस्त्राब्दियों से पुरातन इतिहास है हमारा। जब हर ओर, विशेष रूप से, यूरोप अंधकार युग में था, हम उससे भी हजारों वर्ष पूर्व नारी को पूज रहे थे। भारतवर्ष में स्थित बावन शक्तिपीठ इस बात को प्रमाणित करते हैं कि सनातनी गौरव महिलाओं के सशक्तिकरण से है और उसी गौरव का भान आज वृंदावन स्थित वात्सल्यग्राम कराता है।

वात्सल्यग्राम में महिलाओं के स्वाभिमानी स्वाबलंबन के विस्तार के लिए संविद एक्सपर्ट स्कूल है जहाँ महिलाओं को रोजगारपरक शिक्षा देकर उन्हें रोजगारयोग्य बनाया जाता है जिससे वो अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए, संविद गुरुकुलम जैसा आधुनिक विद्यालय है जहाँ नैतिक शिक्षा भी आधुनिक शिक्षा के सदृश्य महत्वपूर्ण है। आधुनिक सुविधासंपन्न गौशाला, विशिष्ट बच्चों के लिए वैशिष्ट्यम जैसे अनेकों प्रकल्प इस सेवा प्रकल्प के तत्वाधान में निरंतर संचालित हैं, जिसमें शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, महिला विकास जैसे निकाय सतत क्रियाशील हैं।

नारी का सशक्तिकरण एक सभ्य समाज की अवधारणा के लिए अत्यंत आवश्यक है। आधुनिक भारत के इतिहास में भी हमें रानी दुर्गावती, होल्कर, पद्मावती, रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं के महान व्याख्यान सुनने और पढ़ने को मिलते हैं, जिनमें दृष्टिगोचर होता है कि भारत तब भी नारी शिक्षा और शक्ति की साधना का उतना ही पोषक था।

नवरात्रि की शुभकामनाएँ !

वीरता का अद्भुत आख्यान: भानुप्रताप शुक्ल शहीद संग्रहालय

By ChikitsalayaNo Comments

स्वतंत्रता से बलवती भावना कोई नहीं है। स्वतंत्रता से स्वछंदता प्राप्त होती है, मन के अनुसार निर्णय लेने की, क्रिया करने की किंतु ये इतनी सहज और सुलभता से उपलब्ध भी तो नहीं। भारत सैकड़ों वर्षों तक अन्य हिंसक आक्रांताओं की परतंत्रता में रहा है। यद्यपि ये भी एक सर्वविदित तथ्य है कि इन परतंत्र वर्षों में भी स्वाधीनता का भाव कभी समाप्त नहीं हुआ, लुप्त नहीं हुआ। महाराणा प्रताप से छत्रपति शिवाजी, बप्पा रावल से रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे, शहीद भगत सिंह से पंडित आज़ाद तक, ये शाश्वत है कि भारतवर्ष की महान अस्मिता स्वतंत्र ही रही, इससे कोई आक्रांता पार न पा सका।

स्वाधीनता का एक मूल्य होता है। वीर सावरकर हों अथवा भगत सिंह, कैप्टन मनोज पांडे हों या नचिकेता, कर्नल संतोष बाबू से हनुमंथप्पा तक स्वाधीनता के इस महा समर के शौर्यपूर्ण यज्ञ में वीरगति की आहूति देने में कोई कमी नहीं रही। लेकिन इस वीरगति का क्या लाभ यदि इस वीरता को, इस शौर्य को और इस भाव को अपनी अगली पीढ़ी तक न पहुँचाया जाये? यदि हमारे युवाओं को इन वीरता के मुस्कुराते चेहरों से परिचित न कराया जाये तो इस शौर्य का कोई अर्थ न रहेगा।

वृंदावन के वात्सल्यग्राम स्थित शहीद भानु प्रताप शुक्ल संग्रहालय एक प्रयास है अपने महापुरुषों के चरणवंदन का, उनकी वीरता को नमन करने का, अपनी संततियों को उन शूरवीरों से परिचित कराने का, जिनकी वीरता ने हमारे जीवन की स्वधीनता का मूल्य अपने जीवन से चुकाया है। वो शहीद हुए ताकि हम स्वतंत्र रह सकें। वो अपने परिवार से बिछड़ गए ताकि हमारे परिवार की सुरक्षा से कोई खिलवाड़ न हो सके।

शहीद भानु प्रताप शुक्ल संग्रहालय एक प्रयास है युवाओं के मन में देशभक्ति का भाव जगाने का। उनके मन में इस देश के वीरों के प्रति श्रद्धा हो, सम्मान में सर झुकते हों क्यूंकि किसी भी देश की संप्रभुता उस देश की अपने वीर शहीदों के प्रति कृतज्ञता से निश्चित होती है। जो देश अपने वीरों के प्रति उदासीन होते हैं, वहाँ अगली पीढ़ियों में वीरगति के भाव नहीं पनपते।

पुस्तकालय:-
इस संग्रहालय में एक विशाल पुस्तकालय भी है जहाँ अपने वीरों के प्रति उत्सुकता शांत की जा सकती है। यहाँ अनेकों पुस्तकें उपलब्ध हैं जिनमें साहित्य के प्रति अनुरागियों को स्तरीय साहित्य उपलब्ध कराया जाता है। पुस्तकें ज्ञान का परिष्कृत रूप होती हैं। जितनी पुस्तकें पढ़ी जाती हैं, व्यक्ति के विचारों में उतनी ही शुद्धता और मन में उतनी ही शांति होती है। एक कलकल करते झरने से ठहरे समुद्र की यात्रा को तय करना है पुस्तकों का अध्ययन। देशभक्ति की पावन जलधारा में डुबकी लगाने का अनुपम आनंद है शहीद भानुप्रताप शुक्ल संग्रहालय की यात्रा।

आज युवाओं को अपने देश और समाज के इतिहास के विषय में जानकारी रखना आवश्यक है। इतिहास हमारी चूकों और गौरवमयी गरिमाओं का साक्षी होता है। उसका साक्षात्कार हमें पुस्तकें उपलब्ध कराती हैं। उन जानकारियों के माध्यम से हमें अपनी ऐतिहासिक चूकों से सतर्कता का मार्ग मिलता है तो अपने वीर शौर्य की प्रतिमूर्तियों को समझने और उनपर गर्व करने का भाव भी उत्पन्न होता है।

आइये और इस अनुपम श्रद्धामय संग्रहालय में अपने वीर पूर्वजों को नमन कीजिये, अपार आनंद की अनुभूति निश्चित मिलेगी।

सुबह की पहली किरण: संविद एक्सपर्ट स्कूल

By ChikitsalayaNo Comments

सुबह हमेशा नई होती है, ताज़गी लिये, वातावरण में सृजन के गीत गाती, कोपलों के फूटने का विश्वास जगाती, रात के अंधकार को मिटाती, अंकुरों के स्फुटन का प्रण करती, ओस की बूंदों सी सुबह, मन मस्तिष्क को नई ऊर्जा और नवारंभ को बल देती है।

मानव जीवन में अनेकों उपक्रम, घटनाएँ एवं वास्तविकताएँ उस सुबह की गुनगुनी धूप सी ही होती हैं। इन मखमली आभासों में कुछ शुभ संकेत होते हैं। स्त्री के जीवन में एक ऐसी ही ताज़गी भरी सुबह है संविद एक्सपर्ट स्कूल।

संविद एक्सपर्ट स्कूल एक ऐसा प्रकल्प है जहाँ समाज की उन महिलाओं के सशक्तिकरण पर बल दिया जाता है जिन्हें जीवन की कठोरताओं का सर्वाधिक अनुभव होता है। आर्थिक परतंत्रता हो अथवा उत्पीड़न, इन महिलाओं के पास कार्यकौशल जैसी कोई शक्ति नहीं होती जिसकी सहायता से ये अपने जीवन में रंग भर सकें अथवा अपने परिवार की सहायता के बिना अपने लिए कुछ कर सकें।

संविद एक्सपर्ट स्कूल ऐसी महिलाओं को ब्यूटी पार्लर के साथ सिलाई कढ़ाई, सॉफ्ट टॉयज, आर्टक्राफ्ट जैसे अनेकों विधाओं में पारंगत करता है। उन्हें परीक्षण के साथ रोजगार से संबंधित क्रियाकलापों में संलग्न कर उन्हें स्वाबलंबी बनाता है और आर्थिक स्वाबलंबन से जो पथ बनता है, उसका अंतिम पड़ाव स्वाभिमान ही तो है।

इस प्रकार अनेकों रोजगारपरक कार्यक्रमों का लाभ लेकर महिलाएँ अपने लिए एक नई सुबह का स्वप्न बुनती हैं जिसमें आर्थिक स्वतंत्रता हो, स्वाबलंबन की चादर ओढ़ ये महिलाएँ अपने लिए स्वाभिमान का एक नव भवन सृजित करती हैं, जिसमें इनके साथ होती है वो सुबह जिसमें स्वतंत्रता की चिड़िया आनंद मंगल के गीत सुनाती है, जहाँ निराश्रित होने के भाव एक शुभ सृजन रचते हैं और कष्टमय अंधेरों को दूर करते हैं।

संविद एक्सपर्ट स्कूल एक प्रयास है जिसके नवांकुर स्फुटित हुए हैं। इस नवसृजन की पहल को अनेकों पड़ाव पार करने हैं। सहयोग अपेक्षित रहेगा।